नज़रियाः जिग्‍नेश-विग्‍नेश टाइप नेता न केवल राजनीतिक रूप से कच्‍चे हैं बल्कि वैचारिक रूप से भी अनपढ़ हैं।

0
121
Abhishek Srivastav article on Jugnesh vignes
Abhishek Srivastav article on Jugnesh vignes
Download Our Android App Online Hindi News

अभिषेक श्रीवास्तव

जिस दिन सहारनपुर में सचिन वालिया की मौत हुई, जिग्‍नेश मेवाणी ने ट्वीट किया कि कर्नाटक की जनता इस मौत का बदला बीजेपी से चुनाव में लेगी। यह जिग्‍नेश की सदिच्‍छा रही होगी लेकिन यह राजनीति ही आपने आप में गलत है। गलत साबित भी हुई। सहारनपुर तो दूर की बात है, कर्नाटक की जनता ने अपनी ज़मीन पर कलबुर्गी और गौरी की हत्‍या को भी बिसरा दिया। जिग्‍नेश-विग्‍नेश टाइप नवोदित नेता न केवल राजनीतिक रूप से कच्‍चे हैं, वैचारिक रूप से भी अपढ़ हैं। मौका देख कोई उठा के लौका दिया हवा में, विधायक बन गए। आप प्रधानमंत्री बन जाइए, उससे राजनीतिक विवेक थोड़े पैदा हो जाएगा। अपने प्रधानजी इसका साक्षात् उदाहरण हैं।

दो बातें बहुत साफ़ है। पहले भी कह चुका हूं। चुनाव एक बात है, सामाजिक लड़ाई दूसरी बात। सामाजिक लड़ाई की अगुवाई का प्रचार-प्रदर्शन कर के आप चुनाव जीत सकते हैं, चुनाव जीत कर सामाजिक बदलाव नहीं ला सकते। दूसरी बात, चुनाव का परिणाम ज़मीनी हालात का अक्‍स नहीं है। वे दिन गए जब हम सामाजिक हवा से चुनावी नतीजे भांपते थे और चुनावी परिणाम से सामाजिक ट्रेंड का अंदाज़ा लगाते थे।

अब चुनाव और समाज दो अलहदा चीज़ें हैं। चुनाव कुल मिलाकर कुशल प्रबंधन का मामला है। प्रबंधन में ”धन” जुड़ा हुआ है। बिना धन के प्रबंधन नहीं हो सकता। जिसने ”धन” का प्रबंधन किया है, सदन में जाकर आप उसी की गाएंगे। जिग्‍नेश को ही देख लीजिए। खुद तो कांग्रेस का प्रचार किए ही, लगे हाथ बेचारे डॉ. कफ़ील को बंगलुरु की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में बगल में बैठा कर उसकी रही-सही विश्‍वसनीयता खा गए। बाकी, जिसकी लाठी उसकी भैंस। लाठी की जगह जिसका मन करे ईवीएम लगा दे।

मैं पिछले चार साल से देख रहा हूं कि सामाजिक आंदोलन से निकले चेहरों को जनप्रतिनिधि बनाने की कवायद बहुत तेज़ी से चल रही है। कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि शैक्षणिक परिसरों से लेकर सामाजिक आंदोलनों तक फैले लोकप्रिय चेहरों को अपने गुर्गों के मार्फत हाइजैक करना उसी के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है। कल को कन्‍हैया, शहला, मोहित, कमल, अखिल, हार्दिक आदि इत्‍यादि सांसद-विधायक बन जाएंगे, तो नुकसान समाज का होगा। अगर हर कोई चुनाव लड़कर ही समाज बदलने में लग गया, तो बीजेपी का अगले तीस साल तक आप कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। चुनाव उनका मैदान है। उन्‍हें ही खेलने दीजिए।

आंदोलनकारी के चोले में कांग्रेसी एजेंटों की शिनाख्‍़त करिए। समय कम है। सामाजिक आंदोलनों के मंच पर ऐसे सुपारी किलर्स को मत चढ़ने दें। ये व्‍यापक नुकसान करेंगे। इन्‍हें कांग्रेस की तरफ से ठेका देकर भेजा गया है कि जो भी स्‍वतंत्र और बीजेपीविरोधी दिख रहा है, उसे निगल जाओ। आप गंभीर हैं तो अपने मैदान के गड्ढे पाटने पर ध्‍यान दीजिए। अपने मोहल्‍ले से ही शुरुआत करें। अगर आप वाकई बीजेपीयुक्‍त भारत से मुक्‍त होने की इच्‍छा रखते हैं तो कांग्रेस और उसके अंडरग्राउंड बहेलियों से सावधान रहें। बीच की ज़मीन को बचाने पर दम लगाइए जहां डट कर खड़े हो सकें। आज का नतीजा सबक दे रहा है कि विकल्‍प के तौर पर कांग्रेस को देखना ही दरअसल असली विकल्‍पहीनता है। कांग्रेस विकल्‍प नहीं, विकल्‍पखोर है। न समझ आए तो जेडीएस वालों से पूछ कर देखिए।

(लेखक मीडिया विजिल वेबपोर्टल के संपादक हैं)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here