ऑडियो क्लिप से खुला राज, योगी राज में पुलिस नहीं बल्कि BJP विधायक तय करते हैं एनकाऊंटर में किसे मारना है।

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Amaresh Mishra article on Yogi raj encounter
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अमरेश मिश्रा

भाजपा उत्तर प्रदेश मुख्यमन्त्री योगी बड़े गर्व से अपने शासनकाल मे ‘एनकाउंटर राज’ कि बात करते हैं। आँकड़ो को देखें तो अभी तक सिर्फ एक साल मे 1,142 एन्कौन्टर हो चुके हैं; 34 ‘अपराधी’ मारे जा चुके हैं; और 2, 744 ‘हिस्ट्री शीटर्स’ को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह अलग बात है कि इन 34 मारे गये ‘अपराधियों’ मे मथुरा जिले का एक ब्राहमण बच्चा भी है, जो खेल रहा था जब पुलिस की गोली उसे लगी।

आज तक न उसे कोई मुआवज़ा मिला है, न इस संगीन अपराध मे लिप्त कोई पुलिस अफसर गिरफ्तार हुआ है। 34 मारे गये लोगों मे अधिकतर दलित, यादव, गूजर, जाट और मुसलमान हैं। एक भी ठाकुर नही है। Read This – सपा से नरेश उत्तम बने विधानपरिषद उम्मीदवार, सभी उम्मीदवारों क निर्विरोध निर्वाचन तय अब एक आडियो क्लिप सामने आया है, जो योगी के नेतृत्व मे ‘एन्कौन्टर राज’ की पोल खोलता है।

दरअसल बहुत सारे एन्कौन्टर ‘फिक्सड’ होते हैं। इसमे भी भ्रष्टाचार है। कौन मरेगा, कौन बचेगा– पुलिस के अलावा, भाजपा जिला अध्यक्ष और MLA भी तय करते हैं। Read This – अपना दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष सिंह पटेल बनेगें एमएलसी कल के ओडियो क्लिप मे झांसी जिले का SHO एक ‘अपराधी’ से बात कर रहा है। थाना मौऊ-रानीपुर, झांसी का SHO सुनीत कुमार सिंह, मुल्ज़िम लेखराज यादव, जिसके खिलाफ कई अपराधिक मामले दर्ज हैं, से कह रहा है, “एन्कौन्टर का सीज़न (मौसम) चालू है। तुम्हारा मोबाइल नम्बर ‘सरवेलन्स (surveillance) मे है। तुम जल्दी ही मार दिये जाओगे। अगर बचना चाहतो हो तो बबीना के MLA और झांसी भाजपा जिला अध्यक्ष को मैनिज करो।” लेखराज हंसता है और अपनी तरह से जवाब देता है।

फिर SHO से मान- मुनौव्वल करवाने और उसे बचाने की बात करता है। एक जगह लेखराज कहता है कि “मेरा इतिहास बुरा है पर भविष्य उज्ज्वल है।” खुद झांसी के SSP विनोद कुमार सिंह ने माना कि, “यह मामला बेहद गम्भीर है। एक पुलिस अफसर एक अपराधी से ‘बारगेन’ यानी सौदा कर रहा है। SHO को ससपेंड कर दिया गया है।” पर सवाल यह उठता है कि क्या भाजपा जिला अध्यक्ष और MLAs भी मौत और ज़िन्दगी की ‘बारगेनिन्ग’ मे शामिल हैं? SHO की लेखराज से बात तो यही दर्शाती है।

इसका मतलब यह हुआ की मुख्यमन्त्री योगी का यह दावा की उनकी एन्कौन्टर कराने की नीती मे कोई भेदभाव नही है, झूठा है। एन्कौन्टर उन्ही के हो रहे हैं, जिनका कोई पैरोकार नही। इस तरह से देखा जाये, तो कुछ निर्दोष या छोटे अपराधो मे शामिल तत्वों को निशाना बनाया जा रहा। अब तक कोई बड़ा नामी-गिरामी अपराधी नही मारा गया है। यानी मौत में भी ‘नेपोटिस्म’ या कुन्बा परस्ती–और पैसे का लेन-देन!

और सबसे बड़ी बात, कि ‘एन्कौन्टर’ प्रशासनिक निर्णय या कारणो के बजाय राजनैतिक हस्तक्षेप से भी हो रहे हैं! इसका मतलब ‘रूल आफ लॉ’ यानी ‘कानून के राज’ का उल्लन्घन हो रहा है! एन्कौन्टर परिघटना खुद ‘रूल आफ लॉ’ को तोड़ती है। पर जब उस ‘एक्स्ट्रा-कोनस्टीटुइशनल (extra constitutional) प्रक्रिया मे भी भृष्टाचार और पक्षपात घुस जाये–तब तो भगवान ही मालिक है। यही Kleptocracy के भी गुण हैं।

(अमरेश मिश्रा किसान क्रान्तिदल के अध्यक्ष एंव वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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