तुर्कीः एर्दोगान का पैगाम, ‘मुझे ये मंजूर नहीं कि मैं ऐश में रहूूं और सीरिया में मेरे भाई आतंकवाद का शिकार हों’

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नई दिल्ली –  तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगान ने न्यायधीशों की नियुक्ति समारोह में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि “सीरिया, इराक़, में रहने वाले अरब, कुर्द, तुर्कमान, हमारे असली भाई बहन हैं, सीरिया में चल रहे तुर्की के सैन्य ऑपरेशन का मक़सद उन्हें आतँकवादी संगठनों के हमलों से बचाना है,और नागरिकों को आजादी के साथ ज़िन्दगी गुज़ारने देना और उनको उज्जवल भविष्य प्रदान करना है।

तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यब एर्दोगान ने कहा कि हमने कभी अपनी ताकत बुद्धी का प्रयोग कभी इस तरह से नही किया है जिससे किसी को लगे हमने उनका शोषण किया है, हमने कभी किसी देश का सुरक्षा के नाम पर या इंसाफ के नाम पर शोषण नही किया है।

एर्दोगान ने कहा तुर्की ने कभी भी मज़लूमों लाचारों बेबसों के लिये कभी अपनी सीमाओं को बंद नही किया है, हमें ये बात बिल्कुल पसंद नही कि हम ऐश ओ इशरत में रहें और हमारे पड़ोस में लोग भूखे रहें, या हमारे पड़ोसी मुसीबत में रहें,हमने सीमाओं और दिल के दरवाजों को हर किसी के लिये खोल रखा है।

एर्दोगान ने कहा कि सीरिया में चलने वाला उनका सैन्य अभियान ऑलिव ब्रांच शाख़ जेतुन कामयाब रहा है जिसमें अब तक 3622 आतँकवादियों को ज़िंदा या मुर्दा गिरफ्तार किया गया है,तथा इसके अलावा बड़े पैमाने पर खतरनाक हथियारों के जखीरे हमारी पकड़ में आये हैं जिनको सीरिया की तबाही के लिये छुपाकर रखा गया था,तथा हमारा ये ऑपरेश तब तक चलेगा ज़बी तक आफ़रीन में पूरा तौर पर शाँति स्थापित महि होजाती है।

गौरतलब है कि इस्लामिक देशों और पूरी दुनिया में तुर्की ऐसा पहला देश है जिसने अपने देश में सबसे ज्यादा शरणार्थियों को पनाह दे रखी है, तुर्की में सीरिया के लगभग चालीस लाख लोग रहे हैं,ये शरणार्थी बीते सात सालों में सीरिया में चल रहे गृह युद्ध से जान बचाकर तुर्की पहुंचे हैं। इसके अलावा तुर्की ने म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों की मदद करने मे भी दरिया दिली दिखाई है और बंग्लादेश में आकर रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को भारती मात्रा में खाने पीने और दूसरी चीजें उपलब्ध कराई हैं।

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