सिटिजन जर्नलिस्ट: कोई इस खबर को उत्तराखंड सरकार तक पहुंचाओ

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Girls hostel Uttarakhand News
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(उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में अनुसूचित जाति और जनजति की लड़कियों के लिए सरकार ने कई साल पहले एक हॉस्टल बनाया है. लेकिन आज तक उसमें एक भी लड़की को रहने की जगह नहीं मिली. दरअसल यह भवन इस मायने में अधूरा है कि इसमें बाउंड्री और पानी का इंतजाम ही नहीं है. करोड़ रुपए से ज्यादा का यह हॉस्टल लापरवाही का शिकार बनता रहा, तो कुछ साल में गिर जाएगा. कौन होगा इसका जिम्मेदार. सिटिजन जर्नलिस्ट संजय कुमार की रिपोर्ट)

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आप भारतीय संविधान को कितना भी दोष दे लें, लेकिन असली दोषी कौन! वही जो उसको मूर्त रूप देने में नाकामयाब हैं। 1 करोड़ से अधिक लागत से बना ये भवन उसका जीता-जागता छोटा सा उदाहरण है।
बाबू जगजीवन राम योजना के तहत रा पी जी कॉलेज बागेश्वर, उत्तराखंड में अध्ययनरत अनुसूचित जाति-जनजाति की छात्राओं के लिये ये छात्रावास बना है। ये भवन समाज कल्याण के माध्यम से निर्माण निगम (जल निगम की शाखा) द्वारा तैयार कर समाज कल्याण को हस्तांतरित किया जा चुका है।जैसी जानकारी मिली कि इसे कॉलेज प्रशासन द्वारा लेने से इसलिये मना किया गया है क्योंकि इसमें चहारदीवारी नहीं बनाई गई है।
यह भी जानकारी प्राप्त हुई कि सफ़ेद हाथी साबित हो रहा यह भवन अब जाकर RWD के माध्यम से चहारदीवारी से घिर रहा है। 48 छात्राओं के लिए बन रहे इस भवन में पानी की भी उचित व्यवस्था नहीं की गई है। कॉलेज के पास खुद ही पानी की उचित व्यवस्था नहीं है ऊपर से इस दोमंजिले छात्रावास में पानी कैसे चढ़ेगा आप खुद सोचियेगा। एक बार अंत में गौर से फिर देखियेगा इस भवन को कितना समय हो गया होगा इसे हस्तांतरित किये।
कुछ विद्वान भारतीय संविधान को बिना साँस लिये copy paste कहने से नहीं चूकते। लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ से दूर ये खबर एक नागरिक होने के नाते आप सभी के लिये है। यदि किसी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि या उच्चाधिकारी तक ये बात पहुँच सके तो खैर-खबर लेने की कृपा कीजियेगा।

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