ईवीएम के खिलाफ ‘दांडी यात्रा’ कर विरोध जताएंगे पाटीदार

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patidar will organize Dandi yatra against EVM
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पूर्वोत्तर राज्यों में बीजेपी ने आठ में से सात राज्यों में सरकार बना ली है. त्रिपुरा में बीजेपी ने खुद बहुमत प्राप्त किया है. लेफ्ट के अजेय किले को बीजेपी ने फतेह कर लिया है. कांग्रेस त्रिपुरा और नागालैंड में सिफर पर पहुंच गई. तो मेघालय में सबसे बड़े दल होने के बाद भी सरकार बनाने से महरूम रहे हैं. बीजेपी की इस जीत में भी ईवीएम का कमाल विपक्षी दल बता रहे हैं. तो सोशल मीडिया में भी ईवीएम को लेकर सवाल खड़ा किया जा रहा है.

ईवीएम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है. लेकिन गुजरात चुनाव हारने के बाद पास (पाटीदार अनामत आंदोलन समिति) बीजेपी के लिए सिरदर्द बना हुआ है. पाटीदार अनामत आंदोलन समिति का आरोप है कि चुनाव में धांधली की वजह से बीजेपी ने गुजरात की सत्ता हासिल की है. जिसको लेकर पास गुजरात में दांडी यात्रा शुरू करने जा रही है. तारीख भी महात्मा गांधी के दांडी यात्रा से मैच कर रही है. जिसका नारा है ‘ईवीएम को बैन करो बैलेट पेपर को वापस लाओ.’

इस आंदोलन में पाटीदार अनामत आंदोलन से जुड़े नेता शिरकत कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि हार्दिक पटेल का समर्थन इस आंदोलन को है. इसके अलावा दिल्ली में गैर बीजेपी दलों के साथ पास के नेताओं की अलग-अलग बैठक भी हुई है. जिसमें कांग्रेस के नेता भी शामिल हैं. दावा किया जा रहा है कि इस आंदोलन को कई राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त है.

दांडी यात्रा का कार्यक्रम

ये यात्रा 12 मार्च को अहमदाबाद से सुबह 10 बजे शुरू होगी और 14 मार्च को दांडी में शाम 5 बजे खत्म होगी. हालांकि ये यात्रा पैदल की जगह गाड़ियों पर जाएगी. लेकिन ये यात्रा उन्हीं रास्तों से चलेगी जिस पर नमक आंदोलन में कभी गांधी जी चले थे. 12 मार्च को ये यात्रा गांधी आश्रम अहमदाबाद सें आणंद होते हुए बोरसाड पहुंचेगी. 13 मार्च को बोरसाड से चलकर भरूच होते हुए सूरत तक जाएगी. 14 मार्च को सूरत से चलकर दांडी में समाप्त होगी.

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पटेल समुदाय के लोग (सूरत)

इस पूरे यात्रा के संयोजक पाटीदार अनामत आंदोलन के प्रवक्ता अतुल पटेल है. उनके साथ कई और लोग है. अतुल पटेल का कहना है कि गुजरात में बीजेपी के खिलाफ माहौल था. सबसे ज्यादा विरोध सूरत में था. लेकिन बीजेपी को सूरत में एकतरफा जीत हासिल हुई है. इस पर सवाल खड़े हो रहें है. लेकिन जब उनसे पूछा गया कि राजस्थान के उपचुनाव में कांग्रेस कैसे जीती तो उनका जवाब था कि ईवीएम में धांधली मुख्य चुनाव में होती है ना कि उपचुनाव में किया जाता है.

जो बुकलेट पास की तरफ से बांटा जा रहा है. उसमें यूपी चुनाव का जिक्र है. निकाय चुनाव में ईवीएम से वोटिंग में 16 में से चौदह सीट एक पार्टी (बीजेपी) को मिले और जहां बैलेट पेपर से चुनाव हुए वहां 70 फीसदी जीत विपक्ष को मिली है.

ईवीएम को लेकर शिकायतों का अंबार है और इस यात्रा के जरिए पूरे देश में ईवीएम के खिलाफ अभियान चलाने का मकसद है. हालांकि चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक वीवीपैट लागू करने की योजना बना रहा है.

गांधी जी की दांडी यात्रा

महात्मा गांधी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी यात्रा की शुरूआत की थी. जो 6 अप्रैल 1930 में दांडी में समाप्त हुई थी. ये नमक सत्याग्रह था. नमक उत्पादकों के ऊपर अंग्रेजी हुकुमत ने टैक्स लगा दिया था. जिसके खिलाफ गांधीजी ने आंदोलन किया था.

क्या है वीवीपैट

वीवीपैट यानी वोटर वैरीफाईयेबिल पेपर ऑडिट ट्रेल सिस्टम जिसके जरिए वोटर को मतदान करने के बाद मशीन से पर्ची निकलेगी. ये पर्ची 7 सेंकड के लिए मतदाता को दिखाई पड़ेगी फिर मतदान पेटी में चली जाएगी. जिससे वो जान सकेगा कि वोट किसको गया है. अगर किसी मतदाता को शिकायत है तो वो वहीं पर चुनौती दे सकता है. 2014 में पूरे देश में 930000 बूथ बनाए गए थे. तकरीबन 18 लाख 78 हजार बैलेट यूनिट का प्रयोग किया गया था. वहीं 20 हजार वीवीपैट का इस्तेमाल किया गया था.

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गुजरात चुनाव में वीवीपैट

गुजरात के चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी. लेकिन बाज़ी बीजेपी के हाथ लगी सरकार भी बीजेपी ने बनाई. हार्दिक पटेल की पाटीदार अनामत आंदोलन नें कांग्रेस का समर्थन इस चुनाव मे किया था. उनका साथ ऊना आंदोलन से निकले जिग्नेश मेवाणी ने भी दिया.

गुजरात चुनाव में सभी 50128 बूथ पर वीवीपैट का इस्तेमाल किया गया था. चुनाव आयोग ने कुछ जगहों पर पर्ची और मशीन का मिलान भी किया था. आयोग ने दावा किया कि पर्ची ईवीएम से जो मिलान किया गया वो 100 फीसदी खरा उतरा था.

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हालांकि हार्दिक पटेल ने आरोप लगाया था कि 3500 मशीन पहले टेस्ट में फेल हो गई थी. गुजरात कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. गुजरात कांग्रेस की तरफ से कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील रखी. जिसमें ये निवेदन किया गया कि 20 फीसदी पर्चियों की गणना की जाए. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि जब तक ये साबित नहीं हो जाए कि चुनाव आयोग की मंशा साफ नहीं है. तब तक इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकते है.

राजनीतिक दलों ने ईवीएम पर उठाई उंगली

ईवीएम पर 2017 में यूपी चुनाव हारने के बाद मायावती ने उठाया. मायावती ने कहा कि बीजेपी ने ईवीएम में धांधली करके ये चुनाव जीता है. मायावती के इस बात का समर्थन बीजेपी ने छोड़कर लगभग सभी दलों ने किया था. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने मायावती के इस आरोप का समर्थन किया. हालांकि यूपी के साथ हुए पंजाब के हुए चुनाव में कांग्रेस को जीत भी मिली थी. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने ईवीएम की टैंपरिंग की बात खारिज कर दी थी. लेकिन आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने बकायदा दिल्ली विधानसभा में नुमाइश किया था. ये दिखाया गया कि ईवीएम में धांधली की जा सकती है.

12 मई 2017 को चुनाव आयोग ने 42 राजनीतिक दलों के साथ बैठक की और दिखाया कि ये मशीन टैंपर प्रूफ है. जिसके बाद 3 जून को सभी दलों को मशीन को हैक करने की चुनौती दी गई थी. इस काम में कोई सफल नहीं हो पाया था. आप ने आरोप लगाया कि उनको मशीन को खोलने नहीं दिया गया था.

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तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम ज़ैदी ने सभी तरह के आशंकाओं को बेबुनियाद बताया था. नसीम ज़ैदी ने कहा था कि इस मशीन को टैंपर नहीं किया जा सकता है. चुनाव आयोग ने कहा कि उनकी जिम्मेदारी है कि वो ये बताए कि चुनाव पाक साफ हुए हैं. लेकिन 16 राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से बैलेट पेपर से मतदान कराने की अपील की थी.

ईवीएम पर पहला सवाल और पहला फैसला

2009 के आम चुनाव के बाद सबसे पहले ईवीएम पर सवाल बीजेपी के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने उठाया था. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने दिल्ली हाईकोर्ट में रिट पीटिशन नं 11879/2009 के जरिए चुनाव आयोग के खिलाफ अपील की थी. जिसको 17 जनवरी 2012 को खारिज कर दिया गया था. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी. जिसमें पेपर ट्रेल लगाने की गुजारिश सुप्रीम कोर्ट से की गई थी. उस वक्त के जस्टिस पी सदाशिवम और जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने ने पेपर ट्रेल के पक्ष में फैसला किया था.

8 अक्तूबर 2013 के फैसले में कहा गया कि फ्री और फेयर इलेक्शन के लिए पेपर ट्रेल की आश्वयकता है. जनता को ये विश्वास दिलाना अत्यंत जरूरी है कि चुनाव में की धांधली नहीं हुई है. इस फैसले से पहले चुनाव आयोग ने अदालत को बताया था कि वो वीवीपैट की टेस्टिंग कर रही है. 2009 के आम चुनाव में यूपीए को बहुमत मिल गया था. तब कांग्रेस ने स्वामी के अपील को बेबुनियाद बताया था.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

Source: hindi.firstpost.com

 

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